बैंकों, डाकघरों को मिले 30 दिन, बदल सकते है 500-1000 के पुराने नोट,

·

प्रतीकात्मक तस्वीर

नोटबंदी को छह महीने हो जाने के बाद अभी तक पैसों की किल्ल्त आ रही है। जिससे किसानों को बहुत ज्यादा परेशानी आ रही हैं। बैंकों के पास इस वक्त पुराने बंद हुए 500 और 1000 रुपये के करोड़ो रुपये पड़े हुए हैं, जिसको रखना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था।
नोटबंदी के बाद पैसे बदलने के लिए आई दिक्क्त को देखते हुए केंद्र सरकार ने बंद हुए पुराने 500 और1000 नोटों को जमा करने की इजाजत दे दी हैं। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी हुए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब जिले में मौजूद को-ऑपरेटिव बैंक, पोस्ट ऑफिस और राष्ट्रीयकृत बैंक भी अपने पास रखे पुराने नोटों को एक माह के अंदर आरबीआई से एक्सचेंज कर सकेंगे। सहकारी बैंकों के पास पुराने नोट काफी संख्या में पड़े हैं। बैंकों का कहना है कि वे किसानों को इसके चलते कैश नहीं दे पा रहे हैं। नोटबंदी के छह माह बीत जाने के बाद भी उनके पास पुराने नोटों के बंडल हैं जिन्हें वे एक्सचेंज नहीं करवा पाए और अब आरबीआई इन्हें स्वीकार नहीं कर रहा।


सरकार ने बैंकों और डाकघरों को चलन से बाहर किए गए 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को 20 जुलाई तक भारतीय रिजर्व बैंक में जमा कराने की अनुमति दे दी है. यह दूसरा मौका है जब केंद्र सरकार ने बैंकों, डाकघरों और सहकारी बैंकों को बेकार हो चुके नोटों को रिजर्व बैंक में जमा कराने का समय दिया है.
गौरतलब है कि जनता के लिए नोटबंदी के बाद बैंकों में 1000 और 500 के पुराने नोट जमा करने का आखिरी मौका 31 दिसंबर तक था. 1 जनवरी से 31 मार्च तक पुराने नोट सिर्फ रिजर्व बैंक के काउंटरों पर हलफनामे के साथ जमा हुए.
सरकार ने कालाधन पर अंकुश लगाने तथा फर्जी नोटों पर पाबंदी लगाने के मकसद से पिछले साल आठ नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी. ने हाल में कहा था कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़े और ठोस कदम जैसे दीर्घकालिक लाभ मिलेंगे. उन्होंने कहा कि नोटबंदी का मकसद काले धन और भ्रष्टाचार को रोकना था जो की काफी हद तक सफल रहा. इससे सरहद पार से आने वाला जाली नोट भी बंद हो गए. भी बंद हो गया है जो की उनके लाइफ लाइन पर चोट पहुचाता है.
संदर्भ पढ़ें

Subscribe to this Blog via Email :