जानिए किसके लिए जीएसटी अनिवार्य, वाणिज्यिक कर विभाग ने जारी किया नोटिस,

·

वाणिज्यिक कर विभाग ने जारी किया नोटिस

जीएसटी की पेचिदगियों से घबराए कारोबारियों को वाणिज्यिक कर विभाग के नए फरमान ने मुसीबत में डाल दिया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि वैसे दुकानदार या छोटे उद्यमी जो महीने में 1 लाख 70 हजार रुपए की खरीद-बिक्री करते हैं।
अनिवार्य रूप से जीएसटी में पंजीयन करा लें, अन्यथा एक जुलाई के बाद व्यापार की राह कठिन हो जाएगी। वैसे छोटे दुकानदार जिनका महीने का कारोबार इस रािश से कम है उनके लिए पंजीयन अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक है। लेकिन किसी महीने अगर व्यापार की राशि इससे अधिक होती है या साल के अंत में टर्नओवर 20 लाख रुपए से अधिक होगा, तो उनके लिए मुश्किलें बढ़ जाएगी।
ना ही सामग्री निर्माताओं की ओर से उन्हें माल दिया जाएगा ना ही विभाग की ओर से किसी प्रकार की छूट मिलेगी। वाणिज्यिक कर विभाग की नई जानकारी से दवा, सौंदर्य प्रसाधन, स्टेशनरी एवं अन्य छोटे-मोटे दुकानदारों की धड़कनें बढ़ गई है। फिलहाल टिन नंबर लेकर कारोबार करने वालों को अब जीएसटी में पंजीयन लेना होगा।
जीएसटी की पेचिदगियों एवं साल में 36 बार रिटर्न समेत समस्त खरीद-बिक्री का रिकार्ड रखने को लेकर वे परेशान नजर आ रहे हैं। पंजीयन की समस्या एवं सर्वर फेल होने से पहले ही व्यापारी सकते में हैं। 1 जुलाई से 10 जुलाई तक 32 हजार व्यापारियों में से महज 30 प्रतिशत व्यापारी ही पंजीबद्ध हो पाए हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 6 हजार 400 व्यापाररियों का ही जीएसटी में पंजीयन हो पाया है।
दुकानदार जिनका मासिक टर्न -ओवर 1.70 लाख रुपए एवं सालाना 20 लाख रुपए से अधिक होगा, पंजीयन अनिवार्य रुप से ले लें। इससे कम के कारोबारियों के लिए पंजीयन अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक है। व्यापार में अनिश्चिता सदैव बनी रहती है, टर्न ओवर का पता नहीं होता। बेहतर है कि सभी कारोबारी जीएसटी में पंजीयन करा ही लें, अन्यथा भविष्य में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्यिक कर विभाग
बाजार की कठिन प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए नए तौर-तरीके अपनाना ही होगा। व्यापार के विस्तार का यही एकमात्र विकल्प है। जीएसटी को लेकर शुरुआत में कठिनाई अवश्य होगी, पर इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। आगे बढ़ें, मार्ग जरुर मिलेगा। जीएसटी की एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने ये बातें कही। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं प्रदेश के व्यापारी प्रतिनिधियों एवं चार्टेड एकाउटंट को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नालॉजी आपको आगे लेकर जाती है, डरेंगे तो आगे नहीं जा पाएंगे। सभी काम सिस्टम से होगा, इसे डेवलप करना पड़ेगा। आलसीपन प्रगति में बाधक है, आने वाला युग टेक्नालॉजी का है, सिर्फ ज्ञान से कुछ नहीं होगा तंत्र ज्ञान की जरूरत है। भरतिया ने कहा कि सिस्टम बदल रहा है, कठिन है पर अपनाना पड़ेगा। टेक्नालॉजी नई है और कठिन भी है, जो समझेगा अपनाएगा, वही टिकेगा। इससे व्यापार भी बढ़ेगा आमदनी भी बढ़ेगी। नई टेक्नालॉजी के साथ कदमताल नहीं मिलाएंगे तो व्यापार बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। जो नदी के बीच धार में जाते हैं, वहीं आगे जाते हैं, किनारे बैठने वाले तट पर ही बैठे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वो दौर गया जब डाक्टर मरीज की नाड़ी देख दवा देता था। आज एक बूंद खून निकालता है और मशीन बताती है कि मर्ज क्या है। इलाज के लिये डाक्टर दवा लिखता है। वही स्थिति व्यापार की है। नई टेक्नालॉजी से ही व्यापार करना होगा, बाजार में टिके रहने के लिये इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। कैट के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खण्डेलवाल ने कहा कि आगामी 2018 का बजट आएगा तो बैंक की चेक बुक जैसी प्रणाली इतिहास की वस्तु बन जाएगी। आज इसे आप मजाक समझ सकते हैं, पर यही होगा, इसे तय मान लें। डिजीटल पेमेंट का महत्व व्यापार में है, यह बात समझना जरूरी है क्योंकि अब ज्यादा समय नहीं है। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से बिना कंप्यूटर के कुछ भी नहीं होगा। टैक्स पटाना, हिसाब रखना, रिटर्न भरने से लेकर सरकार से बात करना सभी कार्य आनलाइन होगा। कंप्यूटर की अनिवार्यता को समझना और सभी व्यापारियों को बताना जरूरी है। फिलहाल 60 प्रतिशत व्यापारियों के पास कंप्यूटर नहीं है। इसे समझें अन्यथा एक जुलाई से व्यापार नहीं कर पाएंगे। कार्यशाला में महेन्द्र भाई शाह एवं नागपुर के प्रभाकर देशमुख ने स्वागत उद्बोधन दिया। बिलासपुर के युवा सीए. अंकित गुप्ता, रायगढ़ के सीए नवीन खजांची, कोरबा के परमेश चंदेल एवं प्रदेश के चेयरमेन बेनी गुप्ता द्वारा जीएसटी प्रशिक्षण कार्यशाला में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई।
संदर्भ पढ़ें

Subscribe to this Blog via Email :
You Will Like This..