GST के बाद नहीं बेच पाएंगे पुराने गहने, ये आएेगी दिक्कत,

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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू होने पर कस्टमर के लिए ज्वैलर्स को ज्वैलरी बेचना आसान नहीं होगा। जी.एस.टी. आने पर सब कुछ ऑन पेपर हो जाएगा। ज्वैलर्स को अब पुरानी ज्वैलरी खरीदने पर रिवर्स चार्ज देना होगा। साथ ही उसे अपने रिकॉर्ड बुक में पुरानी खरीदी ज्वैलरी की डिटेल देनी होगी। अभी तक ज्यादातर ज्वैलर्स पुरानी खरीद को बुक में नहीं दिखाते थे।

जी.एस.टी. आने के बाद उन्हें सब कुछ अपनी बुक में दिखाना होगा। अभी असंगठित ज्वैलर पुरानी ज्वैलरी की खरीद को अपने इन्वॉइस में नहीं दिखाते। नए सिस्टम में अब ये भी ऑन-रिकॉर्ड होगा। मौजूदा सिस्टम में ज्यादातर कारोबारी पुरानी ज्वैलरी को खरीद कर और उसमें वैल्यू एडिशन कर बेचते हैं। ऐसे में उन्हें केवल डिफरेंस प्राइस पर ही टैक्स देना होता है।
स्टॉक खरीदने पर देना होगा रिवर्स चार्ज


पुराने गोल्ड को बेचने की ऐसी ट्रेड प्रेक्टिस को ऑन रिकॉर्ड लाने का काम सरकार कर रही है। ताकि, उसे ज्यादा से ज्यादा टैक्स मिल सके। सरकार ज्वैलरी खरीदने और बेचने वाले का रिकॉर्ड रखना चाहती है, इसलिए सरकार ने जीएसटी में रूल्स तय किए हैं। अब ज्वैलर को पुराना स्टॉक खरीदने पर रिवर्स चार्ज देना होगा। पुरानी ज्वैलरी पर वैल्यू एडीशन कर या पुराने गहने खरीदकर, नई ज्वैलरी बेचने पर जीएसटी भी देना होगा।
ज्वैलर को देना होगा दो बार टैक्स


उदाहरण के तौर पर अगर कस्टमर 1,00,000 रुपए के पुरानी ज्वैलरी बेचकर 1.50 लाख रुपए की ज्वैलरी खरीदता था, तो कस्टमर और ज्वैलर डिफरेंस यानी 50,000 पर टैक्स देता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब ज्वैलर को 1,00,000 रुपए पर रिवर्स चार्ज सरकार को देगा। 1.50 लाख रुपए की ज्वैलरी पर जी.एस.टी. कस्टमर से लेगा। यानी, ज्वैलर को सरकार को दो बार टैक्स जमा कराना होगा।
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